‘आयुर्वेद का महत्व’ विषय पर पंतनगर विश्वविद्यालय में हुआ वेबिनार का आयोजन। रूद्रपुर के ‘पद्मश्री’ बालेन्दु प्रकाश रहे मुख्य अतिथि।

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा ‘आयुर्वेद का महत्व’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन वर्चुअल मोड में किया गया। वेबिनार में वर्तमान समय में कोविड-19 के वैश्विक प्रकोप और इसके समाधान के संबंध में चर्चा की गयी। इस वेबिनार में मुख्य वक्ता, रूद्रपुर निवासी ‘पद्मश्री’ बालेन्दु प्रकाश रहे।

वेबिनार का उद्घाटन करते हुए कुलपति, डा. तेज प्रताप, ने आयुर्वेद की उत्पत्ति एवं इतिहास के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में आयुर्वेद का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि आयुर्वेदिक औषधियों का मानव शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। वर्तमान वैश्विक महामारी में अनेक ऐसे समाचार पढ़ने को मिलते रहते हैं, जिसमें लोग आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन कर अपने जीवन को निरोगी और स्वस्थ बना रहे हैं।

‘पद्मश्री’ बालेन्दु प्रकाश ने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से कोविड-19 वायरस की पहचान, शरीर में संक्रमण एवं इसके निदान के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कोविड-19 सहित अनेक अन्य बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में भी विस्तार से बताया। प्रजेन्टेशन के दौरान उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति, दिन-प्रतिदिन बढ़ते मानसिक तनाव, हमारा रहन-सहन, देर से सोना एवं सुबह देर से जागना इत्यादि बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कोई भी खाद्यान्न सब्जी, फल इत्यादि जिस मौसम में होता हो, उसी समय खाना चाहिए, उन्होंने इस पर विषेष बल दिया।

निदेशक प्रसार शिक्षा, डा. अनिल कुमार शर्मा, ने समस्त अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मानव को यदि स्वस्थ रहना है तो धीरे-धीरे आयुर्वेदिक औषधि, बुजुर्गों से सीखी हुई परम्पराओं, खान-पान, रहन-सहन इत्यादि को अपनाना होगा, अन्यथा आने वाला समय स्वास्थ्य सम्बन्धी अनेक चुनौतियों से भरा होगा। निदेशक शोध, डा. अजीत सिंह नैन, ने वेबिनार के मुख्य वक्ता ‘पदम्श्री’ बालेन्दु प्रकाश के जीवन परिचय एवं उनके द्वारा प्राप्त की गयी प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया।

इस वेबिनार में कृषि वैज्ञानिक, छात्र एवं कृषक सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस वेबिनार में संयुक्त निदेशक (कृषि प्रसार), डा. अनुराधा दत्ताय प्राध्यापक (पशुपालन), डा. संजय चैधरी प्राध्यापक (सस्य विज्ञान), डा. बी.डी. सिंह एवं घनश्याम जोशी आदि उपस्थित थे।

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