(उत्पीड़न) नवम्बर का वेतन न मिलने और निकाले गये ठेका मजदूरों को वापस रखने को लेकर किया काम बंद, आश्वासन के बाद ही लौटे काम पर।

पंतनगर विश्वविद्यालय के होर्टीकलचर रिसर्च सेंटर में कार्यरत ठेका मजदूरों ने अपने पिछले माह नवम्बर 2021 का लम्वित वेतन भुगतान कराने और कार्य से निकाले गये 33 ठेका मजदूरों को काम पर वापस रखने को लेकर काम बंद कर दिया। निदेशक द्वारा काम पर वापस रखने के बाद ही मजदूर मानें।

ठेका मजदूरों ने बताया कि विश्व विद्यालय में पिछले 18–20 सालों से लगातार कार्यरत हैं। हमें श्रम कानूनों द्वारा देय बोनस,बीमा, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया हैं। अप्रैल माह से ई एस आई अंशदान कटौती की जा रही है । अभी तक ई एस आई कार्ड निर्गत नहीं किया गया है। तमाम लोग बीमारी और दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं उन्हें ई एस आई से इलाज नहीं मिल पा रहा है। कभी समय से वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। अभी तक पिछले माह नवम्बर 2021 का वेतन भुगतान नहीं किया गया है।

जबकि नियमानुसार ठेका मजदूरों को हर महीने की 07 तारीख तक वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। हालांकि विश्व विद्यालय प्रशासन द्वारा हर महीने के 07 तारीख एवं विलम्वित 10 तारीख तक वेतन भुगतान करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं स्वयं कुलपति जी द्वारा आदेश जारी कर ठेका मजदूरों को हर माह के प्रथम सप्ताह में वेतन भुगतान किए जाने का निर्देश दिया गया है। और हर माह 26 कार्यदिवसों का भुगतान किए जाने का निर्देश दिया गया है। परंतु आज तक इन आदेशों का पालन नहीं किया गया है। महीने में 15-20 दिन काम, आदेश के बावजूद माह में 26 कार्यदिवसो का भुगतान नहीं किया जा रहा।

यह भी बताते चलें कि पिछले लम्बे समय से कार्यरत ठेका मजदूरों की उम्र काफी ज्यादा हो गई है अब शासन द्वारा विश्वविद्यालय के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। धन कम होने का बहाना बनाकर बार बार निकाला बैठाली की धमकी दी जा रही है। प्रशासन द्वारा भेदभाव कर श्रम कानूनों का उलंघन किया जा रहा है।

छंटनी बंद कर समय से वेतन भुगतान और पूरे माह 26 कार्यदिवसो के वेतन भुगतान किए जाने को लेकर ठेका मजदूर कल्याण समिति द्वारा शासन प्रशासन से लम्बे समय से लगातार लिखित मौखिक अनुरोध किया जा रहा है। परंतु शासन- प्रशासन द्वारा ठेका मजदूरों की उपेक्षा की जा रही है। शोषण उत्पीड़न पर रोक नहीं लगाई जा रही है।

समय से वेतन भुगतान नहीं करने के कारण ठेका मजदूरों के परिवारों के भरण पोषण, बच्चों की स्कूल फीस, राशन, सब्जियों को लेने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। मजदूरों ने कहा कि शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए अतिशीघ्र हमें वेतन भुगतान नहीं किया जाता और 33 बिठाये गये मजदूर काम पर नहीं जाएंगे तब तक हम लोग काम पर नहीं जाएंगे। निदेशक द्वारा सभी कर्मियो को काम पर वापस रखने का आश्वासन देने के बाद ही ठेकाकर्मी कार्य पर वापस लौटे।

प्रदर्शन और डायरेक्टर से वार्तालाप में बलराम, बब्लू, संजय, अशोक, अमरजीत, कामेश्वर, मनोज, शफीआलम, अजय गुप्ता,यश, आसमां, सुरस्वती, विंदरावती, शकुंतला आदि मजदूर शामिल रहे हैं।

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