चिपको आंदोलन के प्रणेता, वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध, पर्यावरणविद् पद्म विभूषण सुंदरलाल बहुगुणा का हुआ निधन। ऋषिकेश एम्स में ली अंतिम सांस।

चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा का आज दुखद निधन हो गया है। उनके निधन पर पर्यावरण संरक्षण पर कार्य करने वाले एक महान योद्धा को देश ने खो दिया है। कोरोना के चलते पिछले कई दिनों से एम्स में हो रहा था। आपको बता दें 94 साल के सुंदरलाल बहुगुणा का नाम पर्यावरण के क्षेत्र में बेहद इज्जत से लिया जाता है। उनके जाने से उत्तराखंड को एक बड़ी क्षति पहुंची है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा की ”विख्यात पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के महानायक व हिमालय के रक्षक श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दुःख हुआ। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी का योगदान अविस्मरणीय है। उनका निधन संपूर्ण देश तथा विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है। चिपको जैसे विश्वविख्यात आंदोलन का नेतृत्व करने वाले वृक्षमित्र श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी जल, जंगल, मिट्टी और बयार को जीवन का आधार मानते थे। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित उनका जीवन और सिद्धान्त विश्वभर में पर्यावरण हितैषियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। प्रभु से दिवगंत आत्मा की शान्ति एवं शोकाकुल परिजनों एवं शुभचिंतकों को धैर्य प्रदान करने की कामना करती हूं।

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