“जहाँ पवन बहे संकल्प लिए, जहाँ पर्वत गर्व सिखाते हैं,……” पढ़िए पीएम मोदी की जोशीली कविता जो उन्होंने देहरादून में कही।

देहरादून में प्रधानमंत्री मोदी ने यह आश्वस्त करते हुए कहा कि “आजादी के इस अमृत काल में, देश ने जो प्रगति की रफ्तार पकड़ी है वो अब रुकेगी नहीं, थमेगी नहीं, बल्कि और अधिक विश्वास और संकल्पों के साथ आगे बढ़ेगी।”

प्रधानमंत्री ने इस जोशीली कविता के साथ अपनी बात को समाप्त किया  ;

 “जहाँ पवन बहे संकल्प लिए,

जहाँ पर्वत गर्व सिखाते हैं,

जहाँ ऊँचे नीचे सब रस्ते

बस भक्ति के सुर में गाते हैं

उस देव भूमि के ध्यान से ही
 
उस देव भूमि के ध्यान से ही
 
मैं सदा धन्य हो जाता हूँ

है भाग्य मेरा,

सौभाग्य मेरा,

मैं तुमको शीश नवाता हूँ


तुम आँचल हो भारत माँ का

जीवन की धूप में छाँव हो तुम

बस छूने से ही तर जाएँ

सबसे पवित्र वो धरा हो तुम

बस लिए समर्पण तन मन से

मैं देव भूमि में आता हूँ

मैं देव भूमि में आता हूँ

है भाग्य मेरा

सौभाग्य मेरा

मैं तुमको शीश नवाता हूँ


जहाँ अंजुली में गंगा जल हो

जहाँ हर एक मन बस निश्छल हो

जहाँ गाँव गाँव में देश भक्त

जहाँ नारी में सच्चा बल हो

उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए
 
मैं चलता जाता हूँ

उस देवभूमि का आशीर्वाद

मैं चलता जाता हूँ

है भाग्य मेरा

सौभाग्य मेरा

मैं तुमको शीश नवाता हूँ


मंडवे की रोटी

हुड़के की थाप

हर एक मन करता

शिवजी का जाप

ऋषि मुनियों की है

ये तपो भूमि

कितने वीरों की

ये जन्म भूमि

मैं तुमको शीश नवाता हूँ और धन्य धन्य हो जाता हूँ

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