पंतनगर विश्वविद्यालय के ठेकाकर्मियों के लिए लागु हुई ESI सुविधा। ठेका मजदूर कल्याण समिति व इंकलाबी मजदूर केन्द्र ने बताया इसके लिए कैसे और कितने लम्बा किया संघर्ष?

पंतनगर विश्वविद्यालय के ठेका मजदूरों को आखिरकार लम्बे संघर्षों के बाद शासन – प्रशासन से ई. एस.आई. सुविधा मिल गयी है। इस बावत 11 मई 2021 को सहनिदेशक, श्रम कल्याण विश्व विद्यालय प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया जा चुका है। आदेश के अनुसार माह अप्रैल 2021 के वेतन से कर्मचारी / नियोक्ता ई .एस. आई. अंशदान काटा और जमा किया जा रहा है। अब ठेका मजदूरों के परिवार, आश्रितों को ई. एस. आई. की सुविधा मिल सकेगी।

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मालूम हो कि विश्वविद्यालय में पिछले 15-16 सालों से लगातार कार्यरत करीब 2700 ठेका मजदूरों को शासन प्रशासन द्वारा श्रम कानूनों द्वारा देय बोनस, बीमा, चिकित्सा, ई. एस. आई., ग्रेच्युटी, अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।

ठेका मजदूर कल्याण समिति के सचिव अभिलाख सिंह ने बताया कि शासन – प्रशासन की अनदेखी, शोषण उत्पीड़न के खिलाफ पहले इंकलाबी मजदूर केन्द्र के निर्देशन में ठेका मजदूर कल्याण समिति अपनी स्थापना ( वर्ष 2009 में) से ही ठेका मजदूरों को कानूनन मूलभूत सुविधाएं और ई. एस. आई. आदि सुविधाएं दिए जाने को लेकर लगातार संघर्षरत रहे हैं। ठेका मजदूर कल्याण समिति के नेतृत्व में 30 नवंबर 2012 को न्यूनतम वेतन 10,000 रूपए मासिक करने, चिकित्सा ई. एस. आई.आदि सुविधाएं दिए जाने की मांगों को लेकर उत्तराखंड श्रमायुक्त कार्यालय हल्द्वानी में सैकड़ों मजदूरों ने घेराव किया। 05 मार्च 2014 को पंतनगर से सहायक श्रमायुक्त कार्यालय रूद्रपुर तक साइकिल रैली निकाल कर धरना प्रदर्शन किए। जिसमें करीब एक हजार मजदूर शामिल रहे।

ठेका मजदूर कल्याण समिति के सचिव अभिलाख सिंह ने कहा कि ई. एस. आई. के देहरादून कार्यालय एवं स्थानीय कार्यालय में कई ज्ञापन प्रेषित किए।स्थाईकरण के लिए वर्ष 2014 में ठेका मजदूरों ने जुझारू आंदोलन किया। शासन प्रशासन द्वारा मजदूरों की मांगें हल करने के स्थान पर आंदोलनकारियो का भयंकर लाठीचार्ज भारी दमन किया। 24 मजदूरों को गिरफ्तार और 42 मजदूरों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए। शासन प्रशासन के खिलाफ मजदूर संघर्ष में डटे रहे। नेतृत्व विहीन मजदूरों को प्रशासन और यूनियनों के गठजोड़ द्वारा ही शांत किया जा सका।

ठेका मजदूरों के इन सारे संघर्षों की बदौलत श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार को ई. एस. आई. विभाग से दो बार पंतनगर विश्वविद्यालय का सर्वे कराकर 30 जून 2016 को आदेश जारी कर पंतनगर के ठेका मजदूरों को 01जून 2016 से ई. एस. आई. सुविधा लागू करने का आदेश देना पड़ा।

भारत सरकार के शासनादेश की अनदेखी, अवहेलना के खिलाफ वर्ष 2016- 17 में ट्रेड यूनियनों के साथ मोर्चा बनाकर संयुक्त मोर्चा के साथ मिलकर आंदोलन किया गया। जिससे 11 जनवरी 2017 को ई. एस. आई. विभाग देहरादून के उपनिदेशक को निर्देश जारी करना पड़ा कि पंतनगर विश्वविद्यालय में ई. एस. आई. लागू किया जाना अनिवार्य है। पुनः शासन प्रशासन के खिलाफ ठेका मजदूर कल्याण समिति के नेतृत्व में 18 सितंबर 2018 को पंतनगर से सहायक श्रमायुक्त कार्यालय रूद्रपुर तक साइकिल रैली निकाल कर प्रदर्शन किया गया। जिसमें न्यूनतम वेतन 25 हजार रूपए मासिक करने, मृतक आश्रितों को नौकरी, मुआवजा, आंदोलन दौरान लगे फर्जी मुकदमे खत्म करने, नियमितीकरण,ई. एस. आई .को लेकर शासन प्रशासन को ज्ञापन दिए गए।इन सारे संघर्षों में ई. एस. आई. की मांग प्रमुख रही। हालांकि हम अपने संघर्षों से दो बार न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण कराने (न्यूनतम वेतन वृद्धि कराने में) में सफल रहे। पर ई. एस. आई .को लेकर शासन प्रशासन का रूख टाल-मटोल का ही रहा।

ठेका मजदूर कल्याण समिति के सचिव अभिलाख सिंह ने आगे कहा कि शासन प्रशासन द्वारा भारत सरकार के शासनादेश की अवहेलना, उलंघन के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए ई .एस. आई. लागू करने को लेकर ठेका मजदूर कल्याण समिति को वर्ष दिसम्बर 2018 में हाईकोर्ट नैनीताल में मुकदमा दर्ज करना पड़ा। जिसके लिए ठेका मजदूरों ने वार्षिक सदस्यता देकर बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग दिया। हाईकोर्ट द्वारा विश्व विद्यालय प्रशासन, उत्तराखंड सरकार, भारत सरकार ई एस आई विभाग को पार्टी बनाया गया।तब से लेकर न्यायाधीश द्वारा शासन प्रशासन को लगातार तमाम नोटिस जारी किए गए, जिसके दबाव में 16 अगस्त 2019 को उत्तराखंड सरकार के अनुसचिव को विश्व विद्यालय प्रशासन को निर्देश जारी करना पड़ा कि पंतनगर में ई. एस. आई. लागू किया जाए। इधर 07 नवंबर 2019 को उपनिदेशक, ई. एस. आई. विभाग देहरादून को ठेका मजदूरों का पंजीकरण कराने हेतु ई. एस. आई. कोड नंबर जारी करना पड़ा।

ठेका मजदूरों के निरंतर संघर्षों में हाईकोर्ट न्यायालय में लड़ने की बदौलत ही अंततः विश्वविद्यालय प्रशासन को ई एस आई लागू करना पड़ा। हम ई. एस. आई. लागू कराने में सफल रहे। बीमार मजदूरों एवं उनके आश्रितों का जीवन बचाने में इलाज के लिए ठेका मजदूरों व ठेका मजदूर कल्याण समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा मजदूरों, कर्मचारियों के घर घर आर्थिक सहयोग, चंदा जुटाना पड़ा, जिसमें पंतनगर के न्याय पसंद लोगों ने भरपूर मदद की पर अपवाद को छोड़कर प्रशासन द्वारा इलाज में कोई आर्थिक मदद नहीं किया गया। अब ठेका मजदूरों को बीमारी में इलाज के लिए दर दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी। ई. एस .आई .के तहत समुचित इलाज, बीमारी दौरान जीविका हेतु दिहाड़ी सहित राहतकारी सुविधाएं हासिल हो सकेगी, पर इतना काफी नहीं है हमें अपने हक और अधिकारों के लिए शासन प्रशासन से निरंतर लड़ना होगा।

ठेका कल्याण मजदूर समिति के अभिलाख सिंह ने कहा कि सभी मजदूरों को अपने संगठन को मजबूत करना होगा, तभी कोई आंदोलन खड़ा किया जा सकता है और शासन प्रशासन से अपने अधिकारों को हासिल किया जा सकता है।

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