पंत विश्वविद्यालय और शून्य इण्डिया के बीच हुआ करार, औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पादों का किया जाएगा उत्पादन।

गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर के अन्तर्गत इनक्यूबिटी व स्टार्ट अप शून्य इण्डिया के निदेशक सागर नाथ के साथ औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पादों जैसे काली हल्दी, अम्बा हल्दी, पहाड़ी हल्दी लाते (पेय पदार्थ) व कई प्रकार के हर्बल इन्फ्यूज़न (हर्बल टी), इम्यूनिटी व लिवर बूस्टर आदि के तकनीकी प्रयोग एवं व्यावसायिक उत्पादन हेतु (MoU) पर हस्ताक्षर किये गये इसके अन्तर्गत भविष्य में औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित अन्य उपयोगी उत्पादों का उत्पादन एवं विपणन शून्य इण्डिया द्वारा किया जायेगा जिसमें गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जायेगा।

औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पाद सागर नाथ ने एक स्टार्टअप और इनक्यूबीटी के रूप में डा॰ एम॰एस॰ नेगी, प्राध्यापक, सस्य विज्ञान एवं संयुक्त निदेशक, शोध (बौद्धिक सम्पदा प्रबन्धन) में जोकि औषधीय एवं सगंध पौधों के विशेषज्ञ भी हैं के मार्ग निर्देशन में सम्पन्न किया जो कि भविष्य में भी जारी रहेगा।

कुलपति सभागार संख्या 02 में विश्वविद्यालय के कुलपति डा॰ तेज प्रताप, निदेशक शोध, डा॰ ए॰एस॰नैन, डा॰ एम॰एस॰ नेगी, संयुक्त निदेशक, शोध (बौद्धिक सम्पदा प्रबन्धन), डा॰ एस॰के॰ शर्मा, सीईओ, पन्त बिजनेस पार्क, डा॰ सुभाष चन्द्रा, डा॰ के॰पी॰ सिंह, डा॰ पी॰के॰ सिंह, डा॰ अनिक कुमार चहल सभी संयुक्त निदेशक, शोध निदेषालय, डा॰ अजय श्रीवास्तव, सहायक निदेषक, शोध एवं सागर नाथ, निदेशक शून्य इण्डिया उपस्थित थे।

कार्यक्रम का प्रारम्भ निदेशक शोध डा॰ ए॰एस॰ नैन द्वारा सभी के स्वागत व MoU के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उसके बाद डा॰ एम॰एस॰ नेगी, संयुक्त निदेशक शोध (बौद्धिक सम्पदा प्रबन्धन) ने स्टार्ट अप इण्डिया के अस्तित्व में आने व औशधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादों तथा षून्य इण्डिया के साथ इनक्यूबेषन सेन्टर में व्यतीत तकनीकी सत्रों का वर्णन किया और साथ ही बताया कि इस प्रकार के ;डवन्द्ध से उत्तराखण्ड के किसानों विषेश रूप से औशधीय एवं सगंध पौध उत्पादकों को अच्छा बाजार मिल सकेगा जिससे कि उत्तराखण्ड में इन पौधों पर आधारित उद्योगों एवं किसानों को बढ़ावा मिल सकेगा। समारोह के अध्यक्ष माननीय कुलपति डा॰ तेज प्रताप जी ने इस ;डवन्द्ध को एक विषिश्ट ;डवन्द्ध बताया, क्योंकि इस प्रकार के उद्यमों से उत्तराखण्ड की युवा पीढ़ी को भविश्य में रोजगार के साधन उपलब्ध हो पायेगें। उन्होने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में न्यू ऐज फार्मर (नये जमाने के किसान) कृशि क्षेत्र में क्रान्ति ला सकते हैं। उन्होने इस अवसर पर षून्य इडिण्या के मार्ग दर्षक डा॰ एम॰एस॰ नेगी, संयुक्त निदेषक, षोध एवं निदेषक षोध डा॰ ए॰एस॰ नैन के प्रयासों की सराहना की जिससे कि एक स्टार्ट अप को औशधीय एवं सगंध पौधों के क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो रही है।
कुलपति डा॰ तेज प्रताप ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों से इस प्रकार के नये उद्यमियों को प्रोत्साहित करने व इस प्रकार से कृषि आधारित उद्योगों को बल देने का आवाहन किया जिससे कि सम्बन्धित किसान भाईयों को अपनी उपज का अधिक लाभ मिल सके। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक लगातार इस दिषा मंे काम कर रहे हैं जिसमें सरकार का समर्थन भी वांछनीय है। इस अवसर पर श्री सागर नाथ, निदेषक षून्य इण्डिया ने इनकुबिटी के रूप में डा॰एम॰एस॰ नेगी, संयुक्त निदेषक के साथ बिताये महत्वपूर्ण समय व मार्ग दर्षन का आभार प्रकट किया साथ ही औशधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पादों का विवरण भी प्रस्तुुत किया। ;डवन्द्ध पर हस्ताक्षर होने के उपरान्त निदेषक शोध डा॰ ए॰एस॰ नैन द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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