पावर बैंक एप्प का नाम तो सुना ही होगा। सबसे बड़े साइबर फ्रॉड का उत्तराखण्ड पुलिस की STF ने किया खुलासा। एक भारतीय कंपनी का निदेशक गिरफ्तार। कई और भारतीय कंपनियां हैं रडार पर।

वर्तमान में दुनिया मे बढ़ती टेक्नालजी और युवाओं का मोबाइल और मोबाइल एप्लीकेशन के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण, अपराधी भी टेक्निकल हो चले हैं। किसी भी प्रकार की एप्लिकेशन मे या ऑनलाइन के माध्यम से पैसो के लेनदेन के लिए सजग रहना चाहिए। Power Bank App Fraud बिलकुल नए जमाने का फर्जीवाड़ा है, जिसमे देश के युवा और छात्र जो स्मार्टफ़ोन यूजर हैं, उनको निशाना बनाया गया है ।

लाखों डाउनलोड के साथ Google play store पर लोड किए गए पावर बैंक ऐप से जनता के साथ किये गए सबसे बड़े साइबर फ्रॉड मामले का उत्तराखण्ड पुलिस की STF ने खुलासा किया है । प्रारंभिक जांच के अनुसार जनता के पैसों को क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेशों में भेजा गया। लगभग 250 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के लिए भारतीय पंजीकृत कंपनियों को शेल कंपनियों के रूप में इस्तेमाल किया गया। मामले में एक भारतीय कंपनी के निदेशक को 19 लैपटॉप, 592 सिम कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया है। कई और भारतीय कंपनियां रडार पर हैं और प्रमुख संदिग्ध के चीनी मूल के होने की संभावना है।

बहुत से लोग जो पहले शुरुवाती दिनो मे इस एप्लिकेशन से जुड़ गए थे वो तो अपनी पूंजी वापस निकालने मे कामयाब हो गए लेकिन जिन लोगों ने लालच और अधिक लाभ के चक्कर मे और अधिक इन्वेस्ट किया तथा जो बाद मे जुड़े उनके पूरे पैसे डूब गए । इस Power Bank App Fraud के ज़्यादातर शिकार युवा वर्ग और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग हुये हैं।

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