प्राइवेट संस्थानों के कर्मचारियों को नहीं लगाया जा सकता चुनाव ड्यूटी में। गर्भवती व दूध पिलाने वाली महिला कर्मचारियों व निकट रिटायरमेन्ट वालों को भी हैै छूट।

चुनाव सम्बन्धी कानून सहित 44 कानूनी पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने दी जानकारी

काशीपुर। उधमसिंह नगर जिले के मुख्य शिक्षाधिकारी द्वारा चुनाव में ड्यूटी के लिये प्राइवेट स्कूलों से उनके कर्मचारियों की सूची मांगने से यह भ्रम पैैदा हो गया हैै कि चुनाव में प्राइवेट संस्थाओं के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगायी जा सकती है। इस पर स्थििति स्पष्ट करते हुये चुनाव सम्बन्धी कानून सहित 44 पुस्तकों के लेखक व कानूनी जानकर नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 159(2) में उल्लेखित प्राधिकरणों के अतिरिक्त किसी अन्य संस्थान के कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगायी जा सकती है। इनमें उल्लेखित संस्थानों से भी अनुरोध राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा ही किया जा सकता हैै।

चुनाव में ड्यूटी के कानूनी प्रावधानों के सम्बन्ध में नदीम ने बताया कि इसका प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 159(2) मेें उल्लेखित संस्थाओं में गैर सहायता प्राप्त कोई संस्थान, कम्पनी व प्रतिष्ठान नहीं आता हैै इसलिये किसी प्राइवेट स्कूल के कर्मचारी को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जा सकता हैै। यद्यपि आवश्यकता होने पर सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों सहित ऐसे संस्थानों, सरकारी कम्पनी तथा सरकार के नियंत्रण के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जा सकता है।

RTI Activist नदीम ने बताया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रिटर्निंग अधिकारियों की हैंडबुक के पैरा 3 में चुनाव ड्यूटी से संबंधित दिशा निर्देशों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार जिन विभागों व प्राधिकारियों के कर्मचारियों- अधिकारियों की चुनाव ड्यूटी में लगायी जा सकती है उनके भी विभिन्न कर्मचारियों को इससे छूट दी गयी हैै। हैैण्डबुक के पैैरा 3.3.5 के अनुसार ऐसे अधिकारी जो छः माह के भीतर रिटायर होने वाला है या रिटायर हो चुका है किन्तु सेवा विस्तार पर है या पुनर्नियोजित हैै उसकी ड्यूटी नहीं लगायी जानी चाहिये।
पैरा 3.4.2 के अनुसार ऐसी महिला कर्मचारियों जो गर्भवती हैै या बच्चे को दूध पिलाने वाली माताये हैै चाहे मातृ अवकाश पर न हो, उनकी भी चुनाव में ड्यूटी नहीं लगायी जायेगी। इसके अतिरिक्त ऐसी महिला कर्मचारी जो कठिन व जोखिम वाला कार्य नहीं करने की चिकित्सा सलाह पर हों की भी ड्यूटी नहीं लगायी जायेगी। इसके अतिरिक्त ऐसे विकलांग कर्मचारी जो शारीरिक रूप से अशक्त हों तथा मतदान केन्द्र/मतगणना केन्द्र पर जा सकने की स्थििति न हो की भी ड्यूटी नहीं लगायी जायेगी।

RTI Activist नदीम ने बताया कि हैैण्डबुक में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव डय्टी देते समय अधिकारियों की वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाना चाहिये। किसी सीनियर अधिकारी को उसके काफी जूनियर अधिकारी के अधीन ड्यूटी पर न रखा जाये।

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